पर कमनसीबी से हमारे यहा हम ऐसी व्यवस्था का निमार्ण नही कर शके है ईसलिऐ यहा तो सालो तक किसान की जमीन सरकार अपने मन मुताबित ओने पोने दामो में अधिग्रहित करती रही है ओर ये रकम भी किशान को बडी मशक्तके बाद मिलती थी ।
हालाकि पिछले कुछ सालो में किशानो केो मिलने वाले मुआवजे की रकम में काफि हद तक बढोतरी हुई है ओर किशान को मिलने वाला मुआवजा बहोत बढा है पर ऐसे कइ मामले देखे गये है कि मुआवजे की बहोत बडी रकम पाने के बाद भी कुछ सालो में ही किशान की मुआवजे की राशि खर्च हो जाति है ओर किशान की आर्थिक हालत खराब हो जाती।
इसलिऐ अगर किशान को उसकी अधिग्रहित जमीन के मुआवजे के स्वरुप में उसे सालोसाल जमीन का किराया या मुनाफे में हिस्सा दिया जाये तो इससे न सिर्फ किसान के आर्थिक हालात अच्छे होगे लेकिन समाज में व्याप्त आर्थिक असमानता भी बहोत हद तक कम होगी ।
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