Thursday, September 25, 2014

जिस की खुश्बु से महेक उठे मधुवन वो गुलाब हो तुम ,
जिंदगी में  जो कभी पुरा न हो शका वो ख्वाब हो तुम। 
जिसे में ताउमर पढना चाहु ऐसी महोब्बत की किताब हो तुम ,
मेरी जिंदगी का पुरा हिसाब हो तुम ।
माना की मेरे तमाम ददॅ का असबाब हो तुम ,
फिरभी मेरी जिंदगी का नायाब आफताब हो तुम।
            
                  ~~~ सुरेश त्रिवेदी
    असबाब= वजह / कारन 
    आफताब= सुरज

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