मगर काफिले में ऐक हमसफर की कमी रेह गई।
युं तो पुरा गुलशन मेरे पास है,
मगर गुलदस्ते में ऐक गुलाब की कमी रेह गई।
युं तो बहोत हसीन नजारे देखे है ,
मगर आंखो में बस ऐक तेरी ही छबी रेह गई।
युं तो जिंदगी में सब हांसिल कर लिया है,
मगर बस ऐक तेरे बगेर जिंदगी अधुरी रेह गई।
------------- सुरेश त्रिवेदी
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