मन की बात
Saturday, December 7, 2013
इतने भी नासमझ नहीं हे हम की नासमझे तुम्हारे इशारे सनम,
मन ही मन हम तो कब से हो चुके हे तुम्हारे सनम.
युंही नही रखी हे हमने हमारे बीच ये दुरीयां सनम,
समझो हमारी भी होगी कुछ मजबूरियां सनम
--- सुरेश त्रिवेदी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment